IND vs AUS: टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे से पहले एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में जब वह पहली बार ऑस्ट्रेलिया खेलने गए थे, तब वहां की भीड़ का व्यवहार उनके लिए काफी कठिन था। तभी इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और आरसीबी साथी खिलाड़ी केविन पीटरसन (Kevin Pietersen) ने उन्हें एक ऐसी सलाह दी जिसने उनका नजरिया ही बदल दिया।
“डोंट टेक इट पर्सनली” — पीटरसन की सुनहरी सलाह
विराट कोहली ने बताया कि केविन पीटरसन ने उन्हें कहा था —
“Australian crowd बहुत शोर मचाती है, कई बार ताने भी मारती है, लेकिन उसे दिल पर मत लो। अगर तुम मैदान पर डटकर खेलोगे, तो यही लोग तालियां भी बजाएंगे।”
यह सलाह कोहली के लिए बहुत कारगर साबित हुई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों की हूटिंग और स्लेजिंग बुरी लगती थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपने प्रदर्शन की प्रेरणा बना लिया।
ऑस्ट्रेलिया में ‘विलेन’ से ‘किंग कोहली’ तक का सफर
कोहली ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई बार ऑस्ट्रेलिया में मैदान पर आक्रामक रुख अपनाया, चाहे वह भीड़ को मिडिल फिंगर दिखाने की घटना हो या बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 के दौरान सैम कॉन्स्टास से टकराव। उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया में माहौल हमेशा जोशीला होता है, लेकिन यही जगह आपको असली क्रिकेटर बनाती है।”
आज विराट कोहली को ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कई बार “विलेन” कह चुका है, लेकिन वहीं दूसरी ओर वहां की जनता उन्हें “King Kohli” के नाम से भी जानती है। यह विरोधाभास ही उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान बन गया है।
ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों से सम्मान अर्जित किया
कोहली ने कहा कि जैसे-जैसे वह परिपक्व हुए, उन्होंने समझा कि ऑस्ट्रेलियाई भीड़ किसी ऐसे खिलाड़ी का सम्मान करती है जो डरता नहीं और जवाब मैदान पर देता है। यही वजह है कि आज जब वह बैटिंग करने उतरते हैं, तो वही दर्शक उनके हर चौके-छक्के पर तालियां बजाते हैं।