Abhishek Sharma Story: अमृतसर की गलियों से निकला एक लड़का, जिसने बल्ले को भगवान मानकर मंदिर में रखा, आज भारतीय क्रिकेट का चमकता सितारा बन चुका है। ये कहानी है अभिषेक शर्मा की — जहाँ विश्वास ने निडरता से हाथ मिलाया।
बचपन से ही थी भगवान और क्रिकेट में आस्था
अभिषेक ने सिर्फ 13 साल की उम्र में अपनी पहली कमाई ₹2000 दादी को दे दी और कहा – “दादी, इसे प्रसाद चढ़ा दो।” उनके लिए क्रिकेट केवल खेल नहीं, भक्ति थी। उनके पिता राजकुमार शर्मा खुद कोच थे और हमेशा कहते थे – “मैदान को मंदिर मानो, वही तुम्हें सम्मान देगा।”
अमृतसर की गलियों से क्रिकेट के मैदान तक
अभिषेक बचपन से ही अपने पिता की अकादमी में बड़े खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करते थे। मोहल्ले के पार्क में जब वो बैटिंग करते, तो बाकी बच्चे शिकायत करते – “हमसे आउट ही नहीं होता।”
उनके पिता ने भी महसूस किया कि उनका बेटा साधारण खिलाड़ी नहीं है। अंडर-16 टूर्नामेंट में 1200 रन और 60 विकेट लेकर अभिषेक ने साबित कर दिया कि वो “India material” हैं।
Ball bani hi hai maarne ke liye’ – निडर बल्लेबाज़ी का मंत्र
अभिषेक हमेशा से आक्रामक बल्लेबाज़ रहे हैं। वो कहते हैं – “जब गेंद मारने लायक है तो क्यों छोड़ें?” यही सोच उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। IPL 2024 में Sunrisers Hyderabad के लिए धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने सभी को प्रभावित किया।
यहाँ तक कि Rashid Khan ने भी कहा – “पाजी, इसने तो मेरी डर की इमेज ही खत्म कर दी!”
महान गुरुओं से सीखा क्रिकेट का मंत्र
अभिषेक को अपने करियर में Rahul Dravid, VVS Laxman, Ricky Ponting, Brian Lara, और सबसे खास Yuvraj Singh जैसे दिग्गजों का मार्गदर्शन मिला।
युवराज सिंह ने उनके शॉट्स और बैलेंस पर काम किया, जिससे उनका खेल एक नए स्तर पर पहुँच गया।
माँ-बाप और दादी का आशीर्वाद बना ताकत
अभिषेक की माँ ने हमेशा उनकी पढ़ाई और खाने-पीने का ध्यान रखा। पिता ने कोच बनकर सही दिशा दी, और दादी के आशीर्वाद ने उन्हें आत्मविश्वास दिया।
अभिषेक आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हैं — बाढ़ में उन्होंने अमृतसर में ज़रूरतमंदों की मदद की, बिना नाम बताए।
निष्कर्ष: श्रद्धा और निडरता से बना स्टार खिलाड़ी
अभिषेक शर्मा की कहानी बताती है कि अगर आस्था और मेहनत साथ हों, तो कोई सपना अधूरा नहीं रहता।
आज उनका हर शॉट, हर छक्का इसी विश्वास का प्रतीक है कि — “जब दिल में श्रद्धा हो, तो डर अपने आप खत्म हो जाता है।”