Virat Kohli Test Cricket Journey:2011 में जब विराट कोहली को वेस्टइंडीज़ दौरे के बाद टेस्ट टीम से बाहर किया गया, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही खिलाड़ी आगे चलकर भारतीय क्रिकेट का चेहरा बनेगा। उस समय उन्होंने कहा था — “यह अंत नहीं, शुरुआत है।”
उनके इस आत्मविश्वास ने आने वाले 14 सालों में भारतीय टेस्ट क्रिकेट की दिशा ही बदल दी। कोहली ने अपने करियर की शुरुआत मुश्किल हालात में की, लेकिन उनकी मेहनत और जुनून ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा नाम बना दिया।
कप्तान के रूप में टेस्ट क्रिकेट में क्रांति
2014 में विराट कोहली ने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी संभाली, जब भारत आईसीसी रैंकिंग में सातवें स्थान पर था। लेकिन कुछ ही समय में उन्होंने टीम को नंबर-1 बना दिया।
उन्होंने सिर्फ जीत पर नहीं, बल्कि जुनून और फिटनेस पर भरोसा किया। उनकी सोच थी कि अगर टीम फिट होगी तो हर मैदान पर जीत सकेगी। इसी सोच के साथ उन्होंने तेज गेंदबाजों की एक ऐसी फौज बनाई — बुमराह, शमी, सिराज, ईशांत — जिसने विदेशी धरती पर इतिहास रच दिया।
विदेशों में जीत का विराट युग
कोहली का सपना था कि भारत सिर्फ घरेलू मैदानों पर नहीं, बल्कि साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी टेस्ट जीते।
2018 में ऑस्ट्रेलिया में भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज़ जीत ने यह साबित कर दिया कि विराट सिर्फ कप्तान नहीं, बल्कि एक प्रेरणा हैं। उन्होंने अपनी आक्रामकता से दुनिया को दिखाया कि भारतीय टीम किसी से कम नहीं।
टेस्ट क्रिकेट को दिल से जिया, ट्रेंड से नहीं
जब दुनिया T20 की चमक में खो रही थी, तब विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट को “दिल से” जिया। उन्होंने इस फॉर्मेट को नई जान दी — अनुशासन, जुनून और आक्रामकता से भर दिया।
उन्होंने दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ पांच दिन का खेल नहीं, बल्कि क्रिकेट की असली आत्मा है।
शांत अलविदा, लेकिन अमर विरासत
2025 में विराट कोहली ने बिना किसी भव्य विदाई के इंस्टाग्राम पर चुपचाप टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया। उन्होंने “My Way” गाने के साथ यह सफर खत्म किया, लेकिन अपने फैंस के दिलों में वो हमेशा रहेंगे।
उनकी विरासत सिर्फ रिकॉर्ड्स नहीं, बल्कि वो जोश और जज्बा है जिसने भारत को हर परिस्थिति में लड़ना सिखाया।
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